Our Story
यह काम क्यों शुरू हुआ
बिहार के सुपौल जिले में बहुत से बच्चे पढ़ना चाहते हैं — लेकिन उन्हें कोई राह दिखाने वाला नहीं होता।
स्कूल जाते हैं, किताबें उठाते हैं, परीक्षा देते हैं — पर शिक्षा का जो असली मतलब है — समझ, सोच, जागरूकता — वो कहीं खो जाता है। पढ़ाई बस एक काम बन जाती है, जीने का हिस्सा नहीं।
यह देखकर मन में एक बात बैठ गई — जब तक सिखाने का तरीका नहीं बदलेगा, तब तक कुछ नहीं बदलेगा।
2 अप्रैल 2025 को, भवानीपट्टी से ज्ञानार्थी फाउंडेशन की शुरुआत हुई। पहला batch, पहला session — और जब पहले बच्चे की आँखों में 'अरे, अब समझ में आया!' की झलक मिली — वह पल ही इस काम की असली नींव बन गई।
तब से हम यही करते आ रहे हैं — बच्चों को सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि सीखने का तरीका सिखाना।